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कार्तिक पूजा: कार्तिक पूजा विधान और त्रिपुर कथा का महत्व

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कार्तिक पूजा: 16 नवंबर 2020

हिन्दू धर्म में कार्तिक पूजा का महत्त्व बहुत अधिक है, भारत के लगभग सभी राज्यो में कार्तिक पूजा होती है लेकिन वाराणसी शहर में गंगा नदी के तट पर कार्तिक पूजा को मुख्य रूप से देखा जा सकता है, कार्तिक महीने के 11 वें दिन कार्तिक पूजा की जाती है| कार्तिक महीने में तुलसी के साथ सालिग्राम शिला का विवाह की परंपरा भी होती है| एकादशी के इस दिन को उत्तरा एकादशी, प्रबोधिनी एकादशी, देव उत्थान एकादशी या भोदिनी एकादशी के नाम से भी जाना जाता है। उसी दिन तुलसी विष्णु विवाह का आयोजन भी किया जाता है  

 kartik puja

कुछ जगहों पर कार्तिक पूजा के दिन महिलाओं को कुछ अनोखे अनुष्ठान करने के लिए जाना जाता है, जैसे कुछ महिलाओ का मानना है की इस दिन तुलसी को मारने से उनके जीवन और परिवार में खुशहाली आती है| कार्तिक पूजा के दिन स्नान को बहुत अच्छा और पवित्र माना जाता है। शुक्ल पक्ष की एकादशी को बहुत सारे लोग आकाश दीपदान और अन्नदान भी करते है। कार्तिक पूजा में सभी महिलाऐं अपने पति की लंबी आयु और अच्छे स्वास्थ्य की कामना करती हैं। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार सालिग्राम शिला और तुलसी का विवाह सबसे महत्वपूर्ण घटना होती है। हिंदुओं के लिए तुलसी एक पवित्र पौधा है और इस पौधे की पत्तियों को विष्णु पूजा के लिए एक आवश्यक  माना जाता है। सालिग्राम शिला हिंदुओं के लिए एक पवित्र पत्थर होता है और इसकी उत्पत्ति पुराणिक युग में हुई थी। हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार एक बार देवी लक्ष्मी और भगवान् विष्णु में लड़ाई हुई और लड़ाई काफी भयंकर होने पर दोनों ने एक दूसरे को श्राप दे दिया।

भगवान विष्णु देवी लक्ष्मी को श्राप दे देते है, जिसकी वजह से देवी लक्ष्मी तुलसी के पौधे के रूप में तब्दील हो जाती हैं और हमेशा के लिए पृथ्वी पर रहने के लिए तैयार हो जाती हैं। दूसरी तरफ भगवान विष्णु भी लक्ष्मी के श्राप के कारण एक पत्थर के रूप में नदी के किनारे बस जाते है, उनकी इस पत्थर वाली छवि को सालिग्राम के रूप में जाना और माना जाता है| कार्तिक पूर्णिमा के दिन तुलसी और सालिग्राम का विवाह कराया जाता है और माना जाता है की देवी लक्ष्मी इस दिन अपने पति भगवान विष्णु के साथ लौट जाती है|

कार्तिक पूजा विधान:

भारत में हिंदू कैलेंडर में आने वाले कार्तिक माह को वर्ष का सबसे शुभ महीना माना जाता है। शायद इस महीने को शुभ मानने का कारण है कि कार्तिक माह भगवान शिव और विष्णु दोनों को समर्पित होता है। इस महीने में पवित्र गंगा नदी में स्नान करना पवित्र और शुभ माना जाता है। इस माह में स्नान का अनुष्ठान आम तौर पर शरद पूर्णिमा से शुरू होता है और कार्तिक पूर्णिमा के साथ समाप्त होता है, जिसे कार्तिक स्नान के रूप में जाना जाता है।

कार्तिक - त्रिपुर कहानी:

प्राचीन समय में त्रिपुरासुर नामक एक शक्तिशाली शैतान था और उसने ब्रह्मा जी की तपस्या करके वरदान लिया था की कोई भी उसे नुकसान नहीं पहुंचा सकता था। लेकिन समय के साथ उसने लोगो और ऋषियों पर अत्याचार करने लगा, जिसकी वजह से सभी परेशान होने लगे थे| ऋषियों के आह्वाहन पर भगवान शिव ने उस राक्षस को समाप्त करने को कहा और कार्तिक पूजा वाले दिन भगवान शिव ने त्रिपुरासुर राक्षस का अंत कर दिया, त्रिपुरासुर के मरने के बाद सभी देवताओ ने राहत की साँस ली और सभी देवताओ ने भगवान शिव की जय करते हुए उन्हें नमन किया।

मत्स्य की कहानी:

कार्तिक पूजा के दिन से जुड़ी एक और पौराणिक कथा मत्स्य अवतार की है| मत्स्य अवतार को भगवान विष्णु का पहला अवतार माना जाता है, एक बार राक्षसो ने धरती को समुद्र में छिपा दिया था तब भगवान विष्णु ने मत्स्य अवतार में जन्म लेकर धरती को समुद्र से निकाल कर पुनः स्थापित किया था।

कार्तिक पूजा व्रत:

कार्तिक पूजा के दिन सभी लोग सुबह जल्दी उठकर स्नान करते है और पूरे दिन का उपवास रखते है और शाम को शिव पूजा या विष्णु पूजा करने के बाद वो अपना उपवास तोड़ते है| कार्तिक पूजा विधान के अनुसार कुछ लोग उपवास के दिन पानी की एक बूंद का भी सेवन करने से बचते हैं। हालांकि आप उपवास के दौरान हल्की चीजों जैसे फल, दूध, पानी इत्यादि चीजों का सेवन कर सकते हैं।

कैसे करें कार्तिक पूजा?

कार्तिक पूजा विधान करते समय कुछ बुनियादी अनुष्ठानों का पालन करना जरुरी होता है। सबसे पहले आपको उस स्थान को अच्छी तरह से साफ करना होता है, जहाँ पर आप भगवान विष्णु या शिव की मूर्ति को स्थापित करते है। भगवान के चरणों में फूलों को चढ़ाएं,हल्दी या चन्दन से तिलक करें,सिंदूर,अगरबती या धूप भी जला लें,दीपक जला कर रख लें,सभी चीजे करने के बाद लौटे में जल लें लें और अच्युताय नमः या गोविंदाय नमः मन्त्र का जाप करें और अंत में लौटे में से थोड़ा सा जल भगवान के चरणों में अर्पित कर दें उसके बाद बचे हुए जल से घर में छिड़काव कर दें।

उचित पूजा:

भगवान शिव और विष्णु को फूल अर्पित करते समय हमे उनकी भक्ति गीत या मन्त्रो का उच्चारण मन में करते रहना चाहिए| भगवान को 16 प्रकार के भोजन का भोग लगाना चाहिए,पूर्ण श्रध्दा और मन से पूजा अर्चना करनी चाहिए| हम सभी को अपनी श्रध्दा अनुसार गरीबो को खाना खिलाना चाहिए,कपड़े, भोजन और पैसे इत्यादि चीजे दान करनी चाहिए। रात में चंद्रमा को अर्घ्य समर्पित करते हुए हाथ जोड़कर अपने जीवन में सुख और शांति की प्रार्थना करनी चाहिए।

कार्तिक पूर्णिमा का महत्व:

कार्तिक पूर्णिमा का धार्मिक और आध्यात्मिक महत्व अलग ही होता है। ऐसा माना जाता है कि इस दिन भगवान विष्णु की पूजा करने से आपकी सभी परेशानी दूर हो जाती है| कार्तिक पूर्णिमा को तुलसी के पौधे के जन्मदिन के रूप में भी मनाया जाता है। कार्तिक पूर्णिमा का दिन बहुत ही शुभ होता है और इस दिन किए गए दान और अन्य सभी धार्मिक कार्य जीवन में बहुत अधिक लाभ पहुंचाते हैं। कार्तिक पूर्णिमा के दिन पूजा और दान करना 100 अश्वमेध यज्ञ करने के बराबर होता है। कार्तिक पूर्णिमा को अर्थ, धर्म, कर्म और मोक्ष प्रदान करने वाला दिन कहा जाता है।


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