LORD GANESHA GAYATRI MANTRA
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शिवरात्रि: बम बम बोले और नीलकंठ महादेव की कहानी

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महा शिवरात्रि 11 मार्च 2021 को मनाई जाएंगी

भारत वर्ष में महा शिवरात्रि हिन्दुओ के प्रमुख त्योहारो में से एक है, महा शिवरात्रि का अर्थ है भगवान शिव की महान रात | महा शिवरात्रि का त्योहार आमतौर पर हिंदू चंद्र कैलेंडर के अनुसार फाल्गुन या माघ (फरवरी या मार्च) के महीने में अमावस्या के दिन मनाया जाता है। महा शिवरात्रि के शुभ और पावन त्योहार पर लोग बड़ी संख्या में भगवान शिव को प्रसन्न करने के लिए उनकी पूजा अर्चना करने के लिए मंदिरों में जाते हैं। पौराणिक कथाओ के अनुसार, इस दिन भगवान शिव ने पार्वती से विवाह किया था। अधिकतर सभी लोग महा शिवरात्रि के दिन उपवास रखते हैं और मंदिर में जाकर शिव लिंग पर मिठाई, दूध, फूल और बेल के पत्ते इत्यादि चढ़ाते हैं।

महा शिवरात्रि के उत्सव के पीछे ऐतिहासिक महत्व:

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महा शिव गायत्री  मंत्र

ओम सेवाव्री विद्महे, सुलेस्त्य धीमहि,

तन्नो रुद्र प्रच्छोदये |

ओम तत्पुरुषाय विद्महे, महादेवाय धीमहि,

तन्नो रुद्र प्रच्छोदये |

ओम पंचभक्त विद्महे, महादेवाय धीमहि,

तन्नो रुद्र प्रच्छोदये |

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Om serveswarya vidmahe, sulahastaya dhimahi,

Tano rudra prachodayat |

Om tathapurusaya vidmahe, mahadevaya dhimahi,

Tano rudra prachodayat |

Om panchbakthaya vidmahe, mahadevaya dhimahi,

Tano rudra prachodayat |

Maha Mrityunjaya Mantra

ॐ हौं जूं स:  - ॐ भूर्भुव: स्व:

ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम् ।

उर्वारुकमिव बन्धनान् मृत्योर्मुक्षीय मामृतात् ।।

ॐ स्व: भुव: भू: ॐ स: जूं हौं !!

 

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Om haun joon swa: - Om bhoorbhuv: swa:

Siddhagadharv yakshaadyairasundarairip।

Kshayamit sada bhooyaat siddhida siddhidaayinee॥

Om swa: bhuv: bhoo: Om swa: joon haun bhu !!

 

नीलकंठ शिव के पीछे की कहानी :

महाशिवरात्रि के त्योहार के पीछे बहुत सारी पौराणिक कथाएं प्रचलित हैं लेकिन उनमें से सबसे ज्यादा लोकप्रिय कथा नीलकंठ भगवान् की है,इस रूप में भगवान शिव ने दुनिया को विनाश से बचाने के लिए इस दिन जहर पिया था। पुराणों के अनुसार समुंद्र मंथन के समय जो भी चीज समुद्र से निकलेगी उसे एक बार देवताओ को और अगली बार राक्षसों में वितरित करने का फैसला लिया गया था। उसके बाद जब देवता और राक्षस मिलकर समुद्र का मंथन कर रहे थे, तो उसमे से एक विष से भरा हुआ बर्तन निकला, उस बर्तन में मौजूद विष पूरी दुनिया को समाप्त करने के लिए पर्याप्त था और वो विष से भरा बर्तन देवताओं के हिस्से में आया था,तब सभी देवता परेशान हो गए| तब भगवान शिव ने देवताओ और सारी दुनिया को नष्ट होने से बचाने के लिए उस बर्तन का सारा विष पी लिया| बर्तन में मौजूद विष इतना घातक था कि उसे पीने के तुरंत बाद भगवान शिव का गला नीला हो गया और इसी वजह से उन्हें नीलकंठ भगवान् के नाम से पुकारा जाने लगा था।

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महा शिवरात्रि समारोह और बम बम भोले का जाप

भारतवर्ष में महा शिवरात्रि हिंदू महिलाओं के लिए भी एक महत्वपूर्ण त्योहार होता है। इस दिन लगभग सभी हिन्दू विवाहित और अविवाहित महिलाएं देवी पार्वती की पूजा करती हैं। देवी पार्वती को गौरा के नाम से भी जाना जाता है और विवाहित महिलाएं इस दिन अपने विवाहित जीवन में सुख की कामना करने के लिए और अविवाहित महिलाऐं अच्छे पति पाने के लिए देवी पार्वती की पूजा करती हैं। महा शिवरात्रि के पावन अवसर पर सभी विवाहित और अविवाहित महिलाऐं त्योहार की रस्मो का पालन करती है, सुखी और आनंदित जीवन पाने के लिए भगवान शिव और देवी पार्वती की श्रद्धापूर्वक पूजा करती है जिससे उन्हें देवी पार्वती और भगवान शिव का आशीर्वाद प्राप्त होता है।

महा शिवरात्रि के शुभ अवसर पर लोग उपवास रखते हैं,भगवान शिव के भक्ति गीत गाते हैं और भगवान शिव की लोकप्रिय कथाओं को सुनते और सुनाते हैं। महा शिवरात्रि के अवसर पर लोग मंदिर को रंगबिरंगी रोशनी और फूलों से सजाते हैं। लोगों में यह आम धारणा है कि यदि वे इस शुभ दिन उपवास रखते हैं, तो इससे उन्हें सौभाग्य प्राप्त होगा और उनका जीवन समृद्ध हो जाता है। महा शिवरात्रि के दिन सभी मंदिरों के चारों ओर बम बम भोले और शिवजी की जय के नारे सुने जा सकते है।

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त्योहार के मुख्य आकर्षण में से एक है मारिजुआना धूम्रपान (चिलम) करते हैं और शिव भक्तों का मानना है कि भगवान शिव इसे बेहद पसंद करते हैं। इस दिन बहुत सी जगह पर लोग भांग और दूध को मिलकर ठंडाई भी बनाकर पीते और पिलाते भी हैं|

भारत के विभिन्न भागों में महा शिवरात्रि कैसे मनाई जाती है

मध्य प्रदेश में

मध्य प्रदेश राज्य में महा शिवरात्रि का त्योहार बहुत ही हर्षोउल्लास और ऊर्जा के साथ मनाया जाता है। मध्य प्रदेश राज्य में खजुराहो में स्थित शिव सागर में स्नान करने की परंपरा सदियों से चली आ रही है,लोगो को मानना है की शिव सागर में स्नान करने से आपके सभी पाप धूल जाते है,शिव सागर में स्नान करने के बाद सभी लोग वहां स्थित सुंदर मंदिर में जाकर भगवान शिव की पूजा करते हैं। मध्य प्रदेश के ही बुंदेलखंड क्षेत्र के मातंगेश्वर मंदिर में भी शिवरात्रि का उत्सव बहुत धूम धाम से मनाया जाता है,मातंगेश्वर मंदिर में शिवरात्रि का त्योहार 10 दिनों तक मनाया जाता है, इसलिए विभिन्न राज्यों के लोग महाशिवरात्रि के उत्सव में शामिल होने के लिए आते है|

पश्चिम बंगाल में

पश्चिम बंगाल में भी महा शिवरात्रि के त्योहार को बहुत धूमधाम से मनाते है|  महा शिवरात्रि पर लगभग सभी हिन्दुओ के घरो में गंगा से निकाली गई रेत से भगवान शिव की चार मूर्तियां या शिवलिंग बनाने की भी परंपरा काफी प्रचलित है, उन चारो शिवलिंग या शिव की मूर्तियों की अलग-अलग समयों के दौरान पूजा की जाती है। शिवरात्रि के दिन सभी लोग उपवास रखते है। सुबह सभी लोग जल्दी उठकर पहले स्नान करते है, फिर सबसे पहले एक शिवलिंग को लेकर उसे दूध से नहलाते और पूजा करते हैं। उसके बाद दूसरे समय पर वो दूसरे शिवलिंग पर दही चढ़ाते है| तीसरे समय पर तीसरे शिवलिंग को घी से नहलाया जाता है और चौथे समय पर चौथे शिवलिंग को शहद से नहलाया जाता है। फिर अगले दिन सुबह सभी लोग जल्दी उठकर नहा लेते है,फिर मंदिर में जाकर पूजा अर्चना करने जाते हैं, कुछ लोग ब्राह्मणो को भोजन भी कराते हैं और फिर वो अपना उपवास तोड़ लेते हैं।

महाशिवरात्रि एक ऐसा त्यौहार है जिसे लोग बहुत ही हर्षोउल्लास और पूर्ण भक्ति के साथ मनाते हैं और इस तरह के सभी त्यौहार परिवारों के सदस्यो, दोस्तों और रिश्तेदारों को एक साथ लाते हैं। महा शिवरात्रि देश के अलग-अलग हिस्सों में अलग-अलग तरीके से मनाई जाती है।


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