LORD GANESHA GAYATRI MANTRA
  • START - - -
  • Om lambodaraya vidmahe, mahodaraya dhimahi,
  • Tano danti prachodayat. |
  • Om mahakarnay vidmahe, vakratundaya dhimahi,
  • Tano danti prachodayat. |
  • Om ekadantaya vidmahe, vakratundaya dhimahi,
  • Tano danti prachodayat. |
  • Om tathapurusaya vidmahe, vakratundaya dhimahi,
  • Tano danti prachodayat. |
  • - - - END |

मेदाराम सम्मका सरका जतारा

  • Home
  • Festivals
  • मेदाराम सम्मका सरका जतारा
make-your-own-greetings

सममक्का सरलाम्मा जथारा 12 फरवरी 2022 को मनाया जाएगा (आवृत्ति: हर 2 साल मे)

सममक्का सरलाम्मा जथारा भारत के तेलंगाना राज्य में मनाए जाने वाले प्रसिद्ध आदिवासी त्योहारों में से एक है। सममक्का सरका जथारा को मेदराम जथारा भी कहा जाता है। मुलुगु में दंडकारण्य के एक भाग में एटुरूनगरम वन्यजीव अभयारण्य के अंदर मेदुरम नामक एक दूरस्थ स्थान स्थित है| हैदराबाद से 260 किमी की दूरी पर और वारंगल से 95 किमी दूर मेदराम गॉव स्थित है,जिसमे हर दूसरे साल में फरवरी के महीने में एक बार मेदराम जथारा का आयोजन किया जाता है।

 

Sammakka-Sarakka-Jatara  

सममक्का सरलाम्मा जथारा को दुनिया भर में मौजूद आदिवासी समुदायों के सबसे बड़े मेलों में से एक कहा और माना जाता है,इस उत्सव में किसी भी मूर्ति की पूजा नहीं की जाती है। भारत में कुंभ मेले के बाद सबसे बड़ी संख्या में भक्त सममक्का सरलाम्मा जथारा में ही देखने को मिलते है, इस मेले में हर साल लाखों लोग शामिल होते हैं। ऐसा माना जाता है कि इस मेले के दौरान आदिवासियों के देवी देवता उनसे मिलने आते हैं।

सममक्का सरलाम्मा जथारा के जश्न के पीछे की कहानी:

13 वीं शताब्दी में आदिवासीओ की कुछ जनजातियाँ शिकार के लिए गईं थी। शिकार के लिए जाते हुए रास्ते में उन सबको एक नवजात लड़की (सममक्का) को बाघों के साथ खेलते हुए दिखाई दी,उस लड़की के पास तेज रोशनी भी दिखाई दे रही थी। यह सब देखकर सभी जनजातियाँ चौंक गईं और उन्होंने अपनी आँखें बंद करके उस लड़की के लिए भगवान से प्रार्थना की। थोड़ी देर बाद जब उन सबने अपनी आँखें खोलीं तो बाघ गायब हो गए और केवल लड़की ही बची थी जिसे वो अपने साथ ले गए। उसके बाद उस लड़की को जनजाति के मेदा राजू ने अपना लिया और उसने उसका नाम सममक्का रखा,धीरे धीरे सममक्का विवाह लायक हो गई| फिर उस लड़की का विवाह कलतिया के एक सामंती आदिवासी प्रमुख पगिडिदा राजू से करा दिया गया था

सममक्का और पगिडिदा राजू के दो बेटी और एक बेटे का जन्म हुआ,बेटियों के नाम सरक्का, नागुलम्मा और एक बेटे का नाम जम्पन्ना था| पूरा परिवार ख़ुशी के साथ अपना जीवन वयतीत कर रहे थे,लेकिन एक बार उनके क्षेत्र में भारी सूखा पड़ा और जनजातियो का बहुत ज्यादा नुक्सान हुआ और वो सभी करों का भुगतान करने में असमर्थ हो गई थीं। लेकिन उस समय के काकतीय शासक प्रतापरुद्र पर इस बात का कोई फर्क नई पड़ा वो इस बात से नाराज़ थे की आदिवासियो ने कर्ज का भुगतान क्यों नहीं किया है और फिर उन्होंने अपने सैनिको को आदिवासी क्षेत्रों पर कब्ज़ा करने का आदेश दे दिया| सममक्का का पूरा परिवार और आदिवासियो के साथ काकतीय शासक प्रतिहारुद्र के खिलाफ लड़े, जिन्होंने आदिवासी क्षेत्रों पर कब्जा करने की कोशिश की। उस क्रूर लड़ाई में सरक्का, नगुलम्मा, मेदा राजू, पगिडिदा राजू और बहुत सारे आदिवासियो को अपनी जान गंवानी पड़ी थी। सममक्का के पुत्र जम्पन्ना की भी लड़ाई के दौरान मृत्यु हो गई थी।

लेकिन लोगों की जान बचाने के लिए सममक्का ने अपनी लड़ाई जारी रखी। युद्ध के बाद सम्मका चिल्काला गुट्टा की तरफ जाने लगी और बीच रास्ते में ही गायब हो गई। उसके अनुयायियों ने उसे बहुत खोजा,लेकिन उसका कुछ भी पता नहीं चला। लेकिन रास्ते पर उन्होंने एक जगह कुमकुम भारिना को देखा और वे इसे सम्मका के रूप में मानाने लगे और फिर बहादुर मां को श्रद्धांजलि अर्पित करने के लिए सभी आदिवासियो ने मिलकर सममक्का सरलाम्मा जथारा आयोजित किया जाता है।

सममक्का सरलाम्मा जथारा का कार्यक्रम चार दिनों तक आयोजित किया जाता है। इन चार दिनों में शामिल होने वाले कार्यक्रम निम्न प्रकार हैं:

दिन -1: मेले के आयोजन पहले दिन को 'मेदाराम गद्दे' पर सरलाम्मा (जिसे सरक्का भी कहा जाता है) के आगमन के रूप में मनाया जाता है। सरलाम्मा सममक्का की बेटी थी। मेदाराम से 3 किमी दूर एक छोटे से गाँव कन्नापल्ली में एक मंदिर में सरलाम्मा को स्थापित किया जाता है। मंदिर में पुजारी सुबह जाकर सबसे पहले पूजा करते है,फिर अविवाहित महिलाएं,वो दंपति जो संतान पैदा करना चाहते हैं और बीमारियों से पीड़ित लोग इस दिन विशेष पूजा करते हैं। उसके बाद कन्नापल्ली के सभी ग्रामीण मिलकर आरती करते हैं और फिर वो सब मिलकर देवी सरलाम्मा को एक भव्य विदाई देने का आयोजन करते हैं। फिर सभी भक्त मिलकर जालम्ना वागु के माध्यम से सरलाम्मा की मूर्ति को मेदराम गद्दे में लाते है। मेदराम गद्दे पर पहुंचने के बाद विशेष पूजा और अनुष्ठान के साथ सरलाम्मा की पूजा की जाती है। मेदराम जथारा में लाखों भक्त सरलाम्मा के दर्शन करते हैं और विशेष पूजा करते हैं।

दिन -2: मेले के दूसरे दिन को 'मेदाराम गद्दी' में सममक्का के आगमन के रूप में मनाया जाता है। तेलंगाना राज्य सरकार की ओर से जिला कलेक्टर द्वारा आधिकारिक रूप से सममका का स्वागत किया जाता है। सममक्का के आगमन के दौरान, 'एडुरुकोल्ला गट्टम' लोकप्रिय घटनाओं में से एक है। सबसे पहले पुजारी बांस के डंडे लाते है और उन्हें 'गद्दे' पर रख देते है,फिर पुलिस की सुरक्षा के साथ, पुजारी द्वारा सममक्का को गद्दी पर रखा जाता है। आमतौर पर सम्मका को चिलकला गुट्टा में 'कुमकुम भरिना' के रूप में स्थापित कर दिया जाता है, जो की मेदराम से 1 किमी दुरी पर स्थित है। चिलकला गुट्टा में सममक्का के आगमन पर जिला कलेक्टर की मौजूदगी में एसपी ने तीन बार हवा में बंदूक से फायर करते है और बाली को उद्घाटन कर सममक्का को खुश करते है| उसके बाद पुजारी देवता को गद्दी पर लाते है फिर सभी भक्त और समर्थक नारों के साथ सममक्का की प्रशंसा करते है।

दिन -3: जथारा के तीसरे दिन सभी भक्त सममक्का और सरलाम्मा के दर्शन करते है। इस दिन सभी भक्त सबसे पहले 'जम्पन्ना वागु' में पुण्य स्नान करते हैं और उसके बाद देवी के दर्शन करते हैं। फिर सभी भक्त देवी-देवताओं को विभिन्न प्रसाद चढ़ाते हैं। कुछ महिलाएं सममक्का और सरलाम्मा को 'सायर' (आवश्यक वस्तुओं का एक संयोजन) और ऑडी बिययम (पवित्र चावल) भी चढाती हैं। सममक्का और सरलाम्मा जथारा में गुड़ एक महत्वपूर्ण प्रसाद है। इस मेले के दौरान देवी-देवताओं को जो गुड़ चढ़ाया जाता है, उसे 'बांगरम' (सोना) कहा जाता है। तीसरा दिन मेले का सबसे व्यस्त दिन होता है,इस दिन कुछ लोग अपने बाल भी दान करते है,बहुत भक्त अपनी मन्नतें पूरी होने की कामना करते है।

दिन -4: जथारा के चौथे दिन सममक्का और सरक्का के वाना प्रवेशम के रूप में मनाया जाता है। तीन दिनों तक देवी की पूजा करने के बाद,चौथे दिन सममक्का और सरक्का जंगल में वापस जाना होता हैं। यह सममक्का सरक्का जथारा का आखिरी दिन होता है और सभी देवी-देवता वापस जंगल में लौट रहे होते हैं,उन्हें जिस सुरक्षा और श्रद्धांजलि के साथ लाया है उसी तरह उन्हें विदा कर दिया जाता है| फिर इसी दिन सममक्का को वापस चिलकला गुट्टा में लौटा दिया जाता है, सरक्का को कन्नापल्ली में वापस कर दिया जाता है, गोविंदा राजू को कोंडाई में वापस कर दिया जाता है और पगिडिदा राजू को वापस पुणगोंडा से वापस लौटा दिया जाता है।

सममक्का और सरक्का जथारा का अनुष्ठान:

सममक्का सरक्का जनजातियों के रीति-रिवाजों से मिलता-जुलता है। सममक्का सरक्का जथारा माघ शुद्धा पौर्णमी से शुरू होता है और लगातार चार दिनों तक चलता है। भारत के विभिन्न राज्यो अर्थात मध्य प्रदेश, छत्तीसगढ़, उड़ीसा, महाराष्ट्र, कर्नाटक और झारखंड के कुछ हिस्सों से लगभग दस लाख से ज्यादा लोग इस मेले को देखने आते हैं। बहुत सारे भक्त जम्पन्ना वगु में पवित्र स्नान करने के बाद देवी-देवताओं को उनके वजन के बराबर मात्रा में गुड़ चढ़ाते हैं,इस चढ़ाएं जाने वाले गुड़ को बांगरम (सोना) कहा जाता है। यह एक ऐसा त्योहार है जिसे कोई भी वैदिक या ब्राह्मणवादी प्रभाव से नहीं मनाया जाता है।

वर्ष 1940 तक चिलुकला गुट्टा के केवल आदिवासी लोग ही इस मेले को मनाते थे। उसके बाद धीरे-धीरे ये उत्सव पूरे राज्य में फैलने लगा था। जब मेला शुरू हुआ था तब केवल बैलगाड़ी के द्वारा ही लोग मेदराम तक पहुंचते थे| उसके बाद वर्ष 1998 में राज्य सरकार ने सममक्का सरक्का जथारा को 1000 साल पुराने त्योहार को आधिकारिक रूप में घोषित कर दिया था और सड़के भी पक्की बनवा दी थी| इस मेले के दौरान इतना ट्रैफिक होता है की कई बार वारंगल हाईवे पर 60 किमी तक का जाम तक लग जाता है।

मेदराम गॉंव में जिस जगह पर सममक्का सरक्का मेले का आयोजन होता है,उस स्थान पर गोदावरी नदी की सहायक नदी बहती है, जिसे जम्पन्ना वागू कहा जाता है। किंवदंती के अनुसार,जनकपुरी कबायली सेना के खिलाफ लड़ाई के दौरान आदिवासी योद्धा और सममक्का के बेटे जम्पन्ना की मृत्यु हो गई थी,जिसके नाम पर इसका नाम जम्पन्ना वागू पड़ा| हम देखते हैं कि जम्पन्ना वागू के जल का रंग लाल है। यह माना जाता है कि लाल रंग जम्पन्ना के रक्त की वजह से हुआ है।(लेकिन पानी के रंग को मिट्टी की संरचना के लिए वैज्ञानिक रूप से जिम्मेदार ठहराया जाता है।) आदिवासियों का मानना है कि जम्पन्ना वागू में एक पवित्र डुबकी लगाने से उन्हें देवताओं के सममक्का सरक्का के बलिदान की याद दिलाती है| कुछ लोगो का यह भी मानना है कि जम्पन्ना वागू में पवित्र स्नान करने से उनके पाप और बीमारियां दूर हो जाती हैं। जम्पन्ना वगु के ऊपर पर एक पुल का निर्माण किया गया है, जिसे जम्पन्ना वागू पुल कहा जाता है।


Related Articles

12 February
मकर संक्रांति के बारे में महत्वपूर्ण बातें जो आपको जाननी चाहिए

मकर संक्रांति 14 जनवरी 2021 को मनाई जाएगी दक्षिण भारत में मकर संक्रांति 4 दिन तक चलने वाला एक लंबा त्योहार है और जिसमे पहले…

12 February
थिपुसुम त्यौहार क्यों मनाया जाता है, इसके बारे में जानें

थाईपुसम 28 जनवरी 2021 को मनाया जाएगा यह त्यौहार ज्यादातर तमिल समुदाय के हिंदू लोगों द्वारा मनाया जाता है। थाईपुसम के त्योहार को थाइपोसम के…

12 February
मेदाराम सम्मका सरका जतारा

सममक्का सरलाम्मा जथारा 12 फरवरी 2022 को मनाया जाएगा (आवृत्ति: हर 2 साल मे) सममक्का सरलाम्मा जथारा भारत के तेलंगाना राज्य में मनाए जाने वाले…

12 February
क्यों लोग बसंत पंचमी पर देवी सरस्वती की पूजा करते हैं।

16 फरवरी 2021 को बसंत पंचमी मनाई जाएगी तीथि आरंभ: 03:36 AM मंगलवार (16 फरवरी) टिथी समाप्त: 05:46 AM बुधवार (17 फरवरी) वसंत वसंत पंचमी…

12 February
सूर्य जयंती को हम रथ सप्तमी क्यों कहते हैं और रथसप्तमी कहानी

19 फरवरी 2021 को रथ सप्तमी मनाई जाएगी भारत वर्ष में हिन्दुओ द्वारा मनाए जाने वाले प्रमुख तयोहारो में से एक रथ सप्तमी का महत्वपूर्ण…

12 February
होली: भारत में सबसे रंगीन त्योहार - AMEWOO

होली 9 और 10 मार्च 2020 को मनाई जाएगी होली के जश्न में राधा-कृष्ण की भूमिका जैसा कि यह सभी जानते हैं, भगवान कृष्ण अपने…

12 February
शिवरात्रि: बम बम बोले और नीलकंठ महादेव की कहानी

महा शिवरात्रि 11 मार्च 2021 को मनाई जाएंगी भारत वर्ष में महा शिवरात्रि हिन्दुओ के प्रमुख त्योहारो में से एक है, महा शिवरात्रि का अर्थ…

12 February
नवरात्रि: क्यों 9 दिन 9 देवियों और 9 रंगों के साथ मनाया जाता है

भारत में नवरात्रि 2020 शनिवार 17 अक्टूबर से शुरू होकर रविवार 25 अक्टूबर को समाप्त होगा नवरात्रि हिंदू का पवित्र त्योहार है। यह नौ रातों…

12 February
राम नवमी पूजा विधान और मंत्र जाप कैसे करें ?

राम नवमी 2 अप्रैल 2020 को मनाई जाएगी राम नवमी को हिंदू या वैदिक त्योहार भी माना जाता है जो हर साल चैत्र नवरात्रि के…

12 February
महावीर जयंती और इतिहास

महावीर जयंती 6 अप्रैल 2020 को मनाई जाएगी महावीर जयंती जैन समुदाय का सबसे महत्वपूर्ण और धार्मिक त्योहारों में से एक है । यह २३वे…

12 February
हनुमान जयंती इतिहास, मंत्र, पूजा विधी तिथि और समय

हनुमान जयंती 27 अप्रैल 2021 को मनाई जाएगी चैत्र माह के बीच पूर्णिमा के दिन हनुमान जयंती की सराहना की जाती है। हनुमान, जिन्हें अन्यथा…

12 February
उगादी-गुड़ी पड़वा, क्यों लोगों ने हिंदू नव वर्ष के रूप में मनाया

उगादी (गुड़ी पड़वा) 13 अप्रैल 2021 को मनाई जाएगी उगादी त्योहार ज्यादातर तेलंगाना, आंध्र प्रदेश और कर्नाटक के लोगों द्वारा मनाया जाता है। इस राज्य…

12 February
असम में बिहू नृत्य समारोह और महत्व

बिहू 14 अप्रैल से 20 अप्रैल 2020 तक मनाया जाएगा बिहू असम में मनाए जाने वाले महत्वपूर्ण त्योहारों में से एक काफी लोकप्रिय त्योहार है।…

12 February
गणगौर महोत्सव: क्यों इसे विवाह और प्रेम का त्योहार कहा जाता है

गणगौर महोत्सव 15 अप्रैल 2021 को मनाया जाएगा भारत में गणगौर त्योहार ज्यादातर राजस्थान, मध्य प्रदेश, तेलंगाना, पश्चिम बंगाल और गुजरात में मनाया जाता है।…

12 February
स्कंद षष्ठी: भगवान कार्तिकेयन या भगवान सुब्रमण्य की कहानी

28 अप्रैल 2020 को स्कंद षष्ठी  मनाई जाएगी स्कंद षष्ठी कथा: भारत के दक्षिण में स्कंद षष्ठी को बहुत ही ख़ुशी और हर्षो उल्लास के…

12 February
बुद्ध पूर्णिमा 2020: जानिए क्या है बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक

बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक महोत्सव 7 मई 2020 को मनाया जाएगा दुनिया भर में भगवान बुद्ध के जन्मदिन को बुद्ध जयंती, बुद्ध पूर्णिमा या वेसाक…

12 February
गायत्री जयंती मंत्र और पूजा विधी समय

2 जून 2020 को गायत्री जयंती मनाई जाएगी पूर्णिमा तीथी शुरू होती है - 03:45 PM 14 अगस्त, 2019 को पूर्णिमा तीथि समाप्त - 05:59…

12 February
जगन्नाथ रथ यात्रा: इसे गुंडिचा यात्रा भी कहा जाता है

रथ यात्रा 23 जून 2020 को मनाई जाएगी रथयात्रा का त्योहार भारत में सबसे प्रसिद्ध त्योहारों में से एक है, जो कि ज्यादातर उड़ीसा राज्य…

12 February
बोनालु: तेलंगाना क्षेत्र में प्रसिद्ध लोक उत्सव

तेलंगाना में बोनालु 2020 रविवार 28 जून से शुरू होगा और रविवार 19 जुलाई को समाप्त होगा बोनालु दक्षिण भारत के तेलंगाना क्षेत्र का एक…

12 February
हरियाली तीज की तिथि और समय - AMEWOO

23 जुलाई 2020 को हरियाली तीज मनाई जाएगी भारत में हरियाली तीज हिंदू महिलाओ के लिए बहुत महत्वपूर्ण त्योहार है जो उत्तर भारतीय राज्यों उत्तर…

12 February
नागा पंचमी: जानिए नागा पंचमी कहानी और पूजा के फायदे

25 जुलाई 2020 को नागपंचमी मनाई जाएगी भारत में नागपंचमी एक पारंपरिक त्योहार है जिसे चंद्र कैलेंडर के श्रावण मास के पांचवें दिन (पंचमी) को…

12 February
कलकी जयंती: कलयुग का अंत और सत्य युग की पुनः स्थापना

25 जुलाई 2020 को कलकी जयंती मनाई जाएगी शास्त्रों में कहा गया है कि जब कलयुग में धर्म का अंत अपने चरम पर होगा तब…

12 February
श्रवणपुत्र एकादशी कथा, पूजा विधान, तिथि और समय

30 जुलाई 2020 को श्रावण पुत्रदा एकादशी मनाई जाएगी श्रावण पुत्रदा एकादशी के बारे में: श्रावण मास में शुक्ल पक्ष के दौरान पड़ने वाली एकादशी…

12 February
वरलक्ष्मी व्रतम पूजा विधान शुभ मुहूर्त समय और तिथि

वरलक्ष्मी व्रत पूजा 31 जुलाई 2020 को मनाया जाएगा भारत में हिन्दुओ के लगभग हर एक दिन कोई न कोई पर्व होता ही है उनमे…

12 February
रक्षा बंधन: क्या आप संतोषी मां के रक्षा बंधन की कहानी जानते हैं

रक्षा बंधन 3 अगस्त 2020 को मनाया जाएगा “भाई बहन का रिश्ता ऐसा है जिसमे वो एक दूसरे के दिल में क्या है बहुत अच्छी…

12 February
कजरी तीज 2020: पूजा की तारीख और समय

6 अगस्त 2020 को कजरी तीज मनाई जाएगी दिलचस्प बात यह है कि कजरी तीज को छोटी तीज के नाम से भी जाना जाता है,…

12 February
हम कृष्ण के जन्मदिन पर जन्माष्टमी क्यों मनाते हैं

11 अगस्त 2020 को कृष्णा जन्माष्टमी मनाई जाएगी “भारत में जन्माष्टमी एक महत्वपूर्ण त्यौहार है जो की हिंदुओं के भगवान कृष्ण के जन्म का जश्न…

12 February
सिंह संक्रांति सूर्य देव की पूजा करने के लिए समर्पित है

17 अगस्त 2020 को सिन्हा संक्रांति  मनाई जाएगी सिन्हा संक्रांति: उत्सव के बारे में आपको जरूर जानना चाहिए सिन्हा संक्रांति को सिंह संक्रांति के नाम…

12 February
हरतालिका तीज महोत्सव और महत्व

21 अगस्त 2020 को हरतालिका तीज मनाई जाएगी भारत वर्ष में हरतालिका तीज का त्यौहार बहुत हर्षो उल्लास से मनाया जाता है | हरतालिका तीज…

12 February
वराह जयंती:वराह भगवान विष्णु के तीसरे अवतार में जाने जाते है

वराह जयंती 21 अगस्त 2020 को मनाई जाएगी "वराह भगवान, जो भगवान विष्णु के तीसरे अवतार के रूप में जाने जाते है ।" वराह भगवान…

12 February
गणेश चतुर्थी: प्रथम पूज्य गणेश की कहानी

गणेश चतुर्थी 22 अगस्त 2020 को मनाई जाएगी "ओम गम गणपतये नमः शरणम गणेश” "भगवान गणेश आपके जीवन में आपके लिए स्वास्थ्य, धन, ज्ञान और…

12 February
ओणम के पीछे की कहानी और इस त्योहार का कुछ प्रमुख आकर्षण

ओणम 2020 शनिवार 22 अगस्त से शुरू होगा और बुधवार 2 सितंबर को समाप्त होगा भारत के केरल राज्य में मलयालम कैलेंडर के पहले महीने…

12 February
ऋषि पंचमी: भाई पंचमी व्रत कथा और पूजा विधान

ऋषि पंचमी 23 अगस्त 2020 को मनाई जाएगी ऋषि पंचमी का महत्व: ऋषि पंचमी को भारत में काफी हर्षो उल्लास से मनाया जाता है जो…

12 February
राधा अष्टमी: राधा के बारे में आपको जरूर जानना चाहिए

26 अगस्त 2020 को राधा अष्टमी मनाई जाएगी श्री राधा का जन्म हुआ था और यह माना जाता है कि वह बरसाना के एक तालाब…

12 February
गणेश विसर्जन: मूर्ति विसर्जन, संबद्ध अनुष्ठान और विदाई

गणेश विसर्जन 1 सितंबर 2020 को मनाई जाएगी  भारत में गणेश विसर्जन और इसके पौराणिक महत्व भारत वर्ष में गणेश चतुर्थी का रंगीन और ऊर्जावान…

12 February
विश्वकर्मा पूजा क्या है। विश्वकर्मा पूजा के बारे में और जानें

विश्वकर्माविश्वकर्मा पूजा 16 सितंबर 2020 को मनाई जाएगी विश्वकर्मा - वैदिक इतिहास विश्वकर्मा को ब्रह्मांड के दिव्य अभियंता के रूप में जाना जाता है और…

12 February
बतुकम्मा इतिहास के पीछे की कहानियां

बतुकम्मा 2020  - गुरुवार 15 अक्टूबर से शुरू होगा और शुक्रवार 23 अक्टूबर को समाप्त होगा बतुकम्मा एक त्योहार है जो तेलंगाना के सभी क्षेत्रों…

12 February
दशहरा: जानिए माता दुर्गा और रावण के दहन बारे में पृष्ठभूमि कहानी क्या है?

दशहरा 25 अक्टूबर 2020 को मनाया जायेगी दशहरा भारत में सबसे उल्लेखनीय त्योहारों में से एक है और यह नवरात्रि के दसवें दिन मनाया जाता…

12 February
मीराबाई जयंती मीराबाई के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाई गई थी

31 अक्टूबर 2020 को मीराबाई जयंती मनाई जाएगी मीरा बाई भारत की एक महान हिंदू कवि और भगवान कृष्ण की सबसे बड़ी भक्त थीं। मीराबाई…

12 February
दिवाली: बादी दीवाली और लक्ष्मी पूजा प्रकाश का त्यौहार है ।

दिवाली: शनिवार, 14 नवंबर 2020 को मनाई जायेगी दुनिया की हर एक रोशनी खुद के आंतरिक प्रकाश की किरण के साथ भी विपरीत नहीं हो…

12 February
कार्तिक पूजा: कार्तिक पूजा विधान और त्रिपुर कथा का महत्व

कार्तिक पूजा: 16 नवंबर 2020 हिन्दू धर्म में कार्तिक पूजा का महत्त्व बहुत अधिक है, भारत के लगभग सभी राज्यो में कार्तिक पूजा होती है…


Write Your Rating and Suggestion Here

Leave a comment:

Latest posts

Facebook Page

© 2018. Amewoo. All Rights Reserved.