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ओणम के पीछे की कहानी और इस त्योहार का कुछ प्रमुख आकर्षण

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ओणम 2020 शनिवार 22 अगस्त से शुरू होगा और बुधवार 2 सितंबर को समाप्त होगा

भारत के केरल राज्य में मलयालम कैलेंडर के पहले महीने में चिंगम (अगस्त-सितंबर) के महीने में मनाया जाने वाला वार्षिक फसल उत्सव को ओणम के नाम से जाना जाता है। ओणम सभी समुदायों के लोगों द्वारा पूरे राज्य में बहुत ही खुशी और उत्साह के साथ मनाया जाता है। ओणम उत्सव में पूजा, संगीत, लोक नृत्य, खेल, नाव दौड़ और स्वादिष्ट खाद्य पदार्थ शामिल होते हैं।

onam festival in kerala

इस त्योहार को मनाने के दो विशिष्ट महत्व हैं। उनमें से एक है, फसल का उत्सव और दूसरा महाबली की महिमा को याद करना । लोगों का मानना है कि ओणम त्योहार के दौरान महाबली हर किसी के घर जाते हैं। वे राजा महाबली का स्वागत अपने घरों के सामने सुंदर पूकोलम (फूलों की सजावट) के साथ करते हैं।

ओणम के पीछे की कहानी:

एक बार की बात है, केरल में महाबली नामक एक राजा रहते थे। राजा महाबली भगवान विष्णु के परम भक्त थे ,वो एक बहुत बुद्धिमान,न्यायप्रिय, पराक्रमी, दानी और उदार शासक थे । वो अमीर और गरीब के साथ समान व्यवहार किया करते थे , कोई भी जरूरतमंद लोग उनके दरवाजे से कभी खाली हाथ नहीं लौटा था । उनके उदार स्वभाव के कारण वो जनता में बहुत लोकप्रिय थे | कुछ समय बाद महाबली के मन में घमंड आने लगा था,उन्होंने बाद में पृथ्वी और स्वर्ग को जीत कर अपना शासन बढ़ाया। सभी देवताओं ने मिलकर महाबली से बचाने और उसको नष्ट करने के लिए भगवान विष्णु के साथ एक भावनात्मक अपील की।

भगवन विष्णु ने देवताओ की बात सुनकर महाबली का वध करने से मना कर दिया लेकिन उन्होंने कहा की वो मेरा परम भक्त है पहले म उसकी परीक्षा लूंगा और आप लोग निश्चिन्त रहे जल्द ही आपको महाबली से छुटकारा मिल जाएगा | ऐसा सुनकर सभी देवता प्रसन्न हुए और वापिस चले गए ,उसके बाद भगवन विष्णु ने एक वामन का रूप धारण करके महाबली के पास पहुंच गए,जब वो एक यज्ञ कर रहा था । वामन ने महाबली से कहा कि वह एक बहुत ही गरीब ब्राह्मण है और वो राजा के पास अपने रहने के लिए जमीन का एक टुकड़ा मांगने आया है | उसकी बात सुनने के बाद महाबली ने कहा कि उसके पास जितनी जमीन है, वह केवल उतनी ही जमीन दे सकता है। वामन ने महाबली की बात सुनकर कहा कि वह उसे सिर्फ उसके तीन चरणों में शामिल जितनी जमीन ही चाहिए ,उससे अधिक नहीं | राजा को यह सुनकर आश्चर्य हुआ और होश आया कि वामन कोई साधारण व्यक्ति नहीं है। लेकिन महाबली एक राजा है और उसका मानना है कि एक राजा के लिए अपने शब्दों को वापस लेना घोर पाप होगा और उसने ब्राह्मण को भूमि लेने के लिए कहा।

जैसे ही महाबली ने जमीन लेने के लिए कहा तभी वामन ने दिव्य रूप धारण कर लिया और उसके बाद जमीन लेने के पहला कदम रखा तो उनके पहले कदम में पूरी पृथ्वी आ गयी और दूसरे कदम में आकाश ,और उसके बाद उन्होंने राजा से पूछा की तीसरा पैर रखने के लिए जगह कहाँ है। महाबली बहुत अच्छी तरह से जानता था कि वामन का  तीसरा कदम दुनिया को नष्ट कर सकता है और उसने वामन के सामने झुकते हुए अपने हाथों से उसे अपना अंतिम कदम अपने सिर पर रखने को कहा ताकि वह अपना वादा निभा सके। वामन ने अपना पैर राजा के सिर पर रखा और उसे दुनिया की ओर धकेल दिया और भगवान विष्णु ने उसे साल में केवल एक बार केरल की यात्रा के लिए राजा महाबली को वरदान दिया।

ओणम का उत्सव:

ओणम त्यौहार के दौरान केरल जाने का सबसे अच्छा समय है। यह त्यौहार चार से दस दिनों तक चलता है,जिसमे पहला और आखिरी दिन मुख्य माना जाता है । ओणम त्यौहार में हर दिन का एक अलग नाम होता है।

दिन 1 (अथं): केरल के लोग इस दिन को बहुत खास मानते है ,कारण उनका मानना है कि महाबली जब पृथ्वी की ओर पाताल से चलने की तैयारी शुरू करते हैं ।

दिन 2 (चिथिरा): दूसरे दिन फूलों की एक परत बनाते है जिसे पुकलम कहा जाता है और घरों की सफाई का काम चिथिरा के दिन से ही शुरू होता है।

दिन 3 (चोधी): लोग इस दिन अपनी और घर के लिए खरीदारी शुरू करते हैं।

दिन 4 (विशाकम): यह दिन कई प्रतियोगिताओं की शुरुआत होती है जो ओणम के दौरान आयोजित की जाती हैं।

दिन 5 (अनिज्हम): इस दिन, केरल के कई हिस्सों में वल्लमकली बोट रेस शुरू होती है।

दिन 6 (थ्रीकेटा): इस दिन, लोग अपना सारा समय समारोहों में लगाना शुरू कर देते हैं।

दिन 7 (मूलम): इस दिन कई स्थानों पर ओणसद्या और त्योहार से संबंधित नृत्यों का प्रदर्शन किया जाने लगता है।

दिन 8 (पूरादम): इस दिन वोकला और राजा महबली की मूर्तियों को पूक्कलम के बीच में धो कर स्थापित किया जाता है।

दिन 9 (उठ्रादोम): ऐसा माना जाता है कि इस दिन, राजा महाबली केरल राज्य में पहुँचते हैं।

दिन 10 (थिरूवोनम): यह ओणम समारोह का अंतिम और सबसे महत्वपूर्ण दिन होता है। इस दिन, लोग सुबह जल्दी स्नान करते हैं,अपने दोस्तों और रिश्तेदारों में उपहार वितरित करते हैं। मंदिरों में विशेष प्रकार की पूजा भी होती है। ओणम स्पेशल मील ओनसाड्या हर किसी के घर में तैयार किया जाता है। ऐसा माना जाता है कि आखिरी दिन महाबली सभी लोगों से मिलने उनके घर जाते है। वे अपने प्रिय राजा को प्रभावित करने के लिए इस त्योहार को भव्य रूप से ख़ुशी पूर्वक और हर्षो उल्लास के साथ मनाते हैं।

ओणम उत्सव के कुछ प्रमुख आकर्षण:

पुकलम : पुकलम फूल की सजावट या घर के सामने विभिन्न प्रकार के फूलों के साथ रंगोली को संदर्भित करता है। जैसा कि प्रत्येक दिन ओणम कार्निवल के दौरान गुजरता है, पुक्कलम में हर एक दिन नई परत जोड़ी जाती है। महिलाएं पुक्कलम के आसपास कई पारंपरिक नृत्य करती हैं।

ओणसद्या: थिरुवोनम के दिन एक भव्य भोजन तैयार किया जाता है और एक केले के पत्ते पर परोसा जाता है। यह नौ-कोर्स भोजन है जिसमें न्यूनतम चार से 5 सब्जियां होती हैं।

वल्लमकली बोट रेस: वल्लमकली बोट रेस को स्नेक बोट रेस के नाम से भी जाना जाता है। यह ओणम समारोहों की मनोरंजक घटनाओं में से सबसे प्रसीद कलाओ में से एक है। इस दिन नाव की सवारी प्रतियोगिता होती है ,जिसमे एक नाव में 100 नाविक (नाव चलने वाले ) एक-दूसरे के साथ प्रतिस्पर्धा करते हैं।

हाथी जुलूस: ओणम समारोह में हाथी जुलूस सबसे प्रतीक्षित और लोकप्रिय घटनाओं में से एक है। इसमें हाथी को फूलों, आभूषणों के साथ सोने और अन्य धातुओं से सजाया जाता है ,जिससे वो बेहद सुन्दर और आकर्षक दिखाई देते है | उसके बाद वो पूरे त्रिशूर का एक चक्कर लगते है जहाँ यह जुलूस आयोजित होता है। इस घटना के दौरान, हाथी छोटे इशारों के माध्यम से लोगों के साथ नृत्य और बातचीत करता है। इसे देख कर सभी का मन ख़ुशी से भर जाता है।

ओणम समारोह के दौरान केरल के लिए 'टूरिस्ट वीक' मनाने के लिए ओणम को अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर बड़े पैमाने पर प्रचारित किया जाता है। ओणम का हिस्सा बनने के लिए हजारों पर्यटक केरल आते हैं और इस अद्भुत त्यौहार का आनंद उठाते है।


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