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सूर्य जयंती को हम रथ सप्तमी क्यों कहते हैं और रथसप्तमी कहानी

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19 फरवरी 2021 को रथ सप्तमी मनाई जाएगी

भारत वर्ष में हिन्दुओ द्वारा मनाए जाने वाले प्रमुख तयोहारो में से एक रथ सप्तमी का महत्वपूर्ण त्योहार भी है और रथ सप्तमी का दिन भगवान सूर्य को समर्पित होता है। रथ सप्तमी का उत्सव हिंदू कैलेंडर के अनुसार माघ महीने के सातवें दिन आता है। माघ के महीने में आने के कारण रथ सप्तमी को माघ सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है। कुछ जगह पर इसे सूर्य जयंती और सूर्य सप्तमी के नाम से भी जाना जाता है।

 

Ratha Saptami

सूर्य जयंती को हम रथ सप्तमी क्यों कहते हैं?

रथ सप्तमी दो शब्दों रथ और सप्तमी से मिलकर बना है जहां पर रथ शब्द का अर्थ रथ है और सप्तमी शब्द का अर्थ सातवें दिन है अर्थात यह भी माना जाता है कि भगवान सूर्य ने सप्तमी तिथि पर पूरे विश्व को रोशन करना शुरू कर दिया था, इसलिए इस दिन को सूर्य जयंती के रूप में मनाया जाता है।

आप और हम सभी भली भांति जानते है की हम लगातार लंबे समय तक सूर्य को अपनी नग्न आंखों से सीधे नहीं देख सकते हैं, अगर हम ऐसा करते है तो कुछ समय में ही सूर्य की चमक और किरणों से  हमारी आँखों के आगे चकाचोंध महसूस होने लगती है और हमे अपनी नजर हटानी पड़ती है| हम सूर्य को केवल अरुणोदय समय (अर्थात सुबह जब सूरज निकल रहा होता है) के दौरान देख सकते हैं। अरुणोदय समय का अर्थ होता है, वह समय जिस समय भगवान सूर्य अपने रथ और सारथी के साथ दिखाई देते हैं, अरुणा भगवान सूर्य के सारथी का नाम है। अरुणा का अर्थ होता है लाल, सुर्ख और तीखा। ऐसा माना जाता है कि अरुणा उगते समय सूर्य की लाल चमक की एक अलग विशेषता होती है।

रथ सारथी और रथम को महत्व देते हुए सूर्य सप्तमी को रथ सप्तमी का नाम दिया गया है। हम मानते हैं कि भगवान सूर्य अपने रथ पर 365 दिन पृथ्वी के चारो ओर घूमते रहते हैं। यदि हम उन्हें यहाँ देखने में असमर्थ हैं, तो इसका मतलब वह कही दूसरी जगह दिखाई दे रहे होते है। इसका अर्थ है की भगवान् सूर्य बिना किसी विराम के अपने रथ का उपयोग पूरे वर्ष करते रहते है| इसलिए रथ को महत्व देते हुए सप्तमी के दिन सूर्य भगवान ने अपनी किरणों से दुनिया को रोशन करना शुरू किया था, इसे रथ सप्तमी नाम दिया गया था।

यह माना जाता था कि भगवान सूर्य के रथ में सात घोड़े होते हैं। उन सात घोड़ों के नाम गायत्री, बृहती, उषनी, जगती, त्रिशबत, अनुशुभुत और पंचति हैं।

भगवान् सूर्य का महत्व:

भगवान सूर्य मानव जीवन के स्रोत हैं, इसीलिए हम सूर्य को भगवान मानते हैं,हिन्दुओ के अनुसार सूर्य भगवान को एक महत्वपूर्ण देवता माना जाता है। लोग भगवान सूर्य को स्वास्थ्य और धन का प्रदाता के रूप में मानते हैं। इसलिए सूर्य की पूजा सुबह की जाती है जो हमारी ऊर्जा को फिर से जीवंत करने और हमारे शरीर और दिमाग को शुद्ध करने में मदद करता है। यह वैज्ञानिक रूप से भी साबित हो चूका है कि सुबह के समय सूर्य के संपर्क में आने से हमारे शरीर को कई प्रकार के लाभ प्राप्त होते हैं। इसलिए बहुत सारे लोग सुबह जल्दी उठकर सूर्य की किरणों से लाभ पाने के लिए सूर्य नमस्कार करते हैं।

रथ सप्तमी के पीछे हिंदू पौराणिक कथाएं और मिथक:

हिंदू ज्योतिष और पौराणिक कथाओं के अनुसार सूर्य को सबसे महत्वपूर्ण तत्व माना जाता है, इसलिए उसे नवग्रहों के केंद्र में रखा गया है। भगवान सूर्य को बहादुरी, शक्ति, साहस, अधिकार और प्रसिद्धि के लिए जाना जाता है। उन्हें तीन नक्षत्र अर्थात् कृतिका, उत्तरा फाल्गुनी और उत्तरा आषाढ़ के लिए भगवान के रूप में भी माना जाता है।

यहां तक कि हिंदू धर्मग्रंथ में भी यह उल्लेख किया गया था कि सूर्य हमारे ग्रहों से घिरा हुआ है। वेदों में भी सूर्य और ग्रहों की विशेषताओं का स्पष्ट उल्लेख किया गया है। ऐसा माना जाता है कि रथ सप्तमी के दिन सूर्य दक्षिण-पूर्व से उत्तर-पूर्व की ओर बढ़ता है। तो इस दिन भगवान सूर्य को बेहतर स्वास्थ्य और कल्याण के लिए पूजा जाता है।

कई हिंदू पौराणिक कथाओं के अनुसार कुछ सांस्कृतिक मान्यताएं हैं,जो निम्न प्रकार हैं:

रथ सप्तमी के दिन भगवान सूर्य का जन्म ऋषि युगल कश्यप और अदिति के घर में हुआ था| इसलिए काफी लोगो का मानना है कि इस दिन भगवान सूर्य से प्रार्थना करने से उन्हें सभी पापों से मुक्ति मिल जाती है।

1. पौराणिक कथाओ में से एक कथा के अनुसार, प्राचीन समय में यशोवर्मा नामक एक राजा थे। लेकिन काफी लम्बे समय के बाद भी राजा के पास कोई संतान नहीं थी| राजा काफी परेशान थे, फिर उन्होंने भगवान सूर्य की पूजा की और भगवान सूर्य के आशीर्वाद से उन्हें पुत्र प्राप्त हुआ, लेकिन राजा का पुत्र अक्सर बीमार रहता था। राजा अपने पुत्र के स्वास्थ को लेकर काफी चिंतिंत रहते थे, तभी एक संत ने राजा को सलाह दी कि आपके पुत्र को आपके पिछले पापो की सजा मिल रही है, इसीलिए आपको अपने सभी पिछले पापों से मुक्त होने के लिए रथ सप्तमी पूजा करनी चाहिए, तब राजा ने रथ सप्तमी पूजा की और फिर उनके पुत्र का स्वास्थ्य बिलकुल ठीक हो गया था।

2. एक मिथक के अनुसार रथ सप्तमी के दिन भीष्म पितामह ने अपनी अंतिम सांस ली थी।

3. एक और मिथक के अनुसार भगवान राम को ऋषियों ने सलाह दी थी की वो रावण से युद्ध करने से पहले भगवान सूर्य की पूजा करें, जिससे भगवान सूर्य आपकी जीत को सुनिश्चित करने का आशीर्वाद आपको देंगे।

4. एक अन्य कथा के अनुसार राजा संत्रित ने भगवान सूर्य की उपासना मणि सामंतकामणि को प्राप्त करने के लिए की थी, जिसे उन्होंने भगवान कृष्ण और सत्यभामा को उनके विवाह के उपलक्ष पर दे दी थी।

रथ सप्तमी पर पूजा कैसे करें ?

रथ सप्तमी के दिन हमें सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठ कर घर साफ़ सफाई करके स्नान करना चाहिए फिर भगवान सूर्य की पूजा करनी चाहिए। महिलाऐं भगवान सूर्य की 7 घोड़ो के रथ वाली तस्वीर के सामने रंगोली बनाती है। रथ सप्तमी के दिन इरुक्कम के पत्ते का अलग महत्व होता है, महिलाएं 7 इरुक्कम के पत्ते लेकर उनके उनके थोड़े से कच्चे चावल और चुटकी भर भर हल्दी सभी पत्तो पर रख देती है,फिर नहाते समय उनमे से एक पत्ता सिर पर, दो कंधे पर, दो घुटने पर और दो पैर पर रखे जाते हैं और पवित्र स्नान किया जाता है। पुरुष नहाने के लिए हल्दी के बिना केवल एरकम के पत्ते और चावल का उपयोग करते हैं।

प्राचीन समय में यह अनुष्ठान नदियों में किया जाता था, लेकिन अब यह अरुणोदय के समय घर पर ही किया जाता है,उसके बाद सूर्यदेव भगवान की पूजा की जाती है।भारत में काफी सारे मंदिर है,जो केवल भगवान सूर्य के सम्मान में बनवाए गए हैं। इस दिन कुछ लोग भगवान सूर्य के मंदिरों में जाकर पूजा करते है और कुछ लोग घर पर ही पूजा करते हैं| रथ सप्तमी के उत्सव पर पूजा करने के लिए भगवान सूर्य की मूर्ति या पेंटिंग, फूल, फल, बिना पके हुए चावल, तिल, सुपारी, नारियल, गुड़, हल्दी पाउडर, कुमकुम इत्यादि की जरुरत होती है| भगवान सूर्य को सुपारी, नारियल, गुड़, फूल, फल, बिना चढ़े चावल और तिल चढ़ाकर पूजा की जाती है। पूजा के बाद नारियल, सुपारी, केला और फलों के साथ-साथ नैवेद्यम के लिए चक्करा पोंगल और वड़ा तैयार किया जाता हैं।

यह भी माना जाता है कि इस रथ सप्तमी के दिन उपवास रखने से आपको अपने पापों से मुक्ति मिल जाती है और आपके जीवन में आने वाली नकारात्मकता को दूर होती है| कुछ लोगों का मानना है कि इस दिन जरूरतमंदों को भिक्षा और दान देने से हमें मोक्ष को प्राप्त करने में मदद मिलती है।


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